बुजुर्गों की आंख में आंसू न आए, यही सच्ची सेवा

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बुजुर्गों की आंख में आंसू न आए, यही सच्ची सेवा

युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण जी के विद्वान सुशिष्य डॉ मुनि पुलकित कुमारजी के सानिध्य ट्रिप्लीकेन तेरापंथ भवन में 65 वर्ष से ऊपर उम्र वालों का दादा दादी चित्त समाधि शिविर का आयोजन किया गया। शिवीर को संबोधित करते हुए बुढ़ापा अभिशाप नहीं वरदान बने विषय पर डॉ मुनिश्री ने कहा-मनुष्य तीन अवस्थाओं से गुजरता है, उसमें बाल और युवावस्था तो शारीरिक क्षमता के साथ कैसे निकल जाती है पता ही नहीं चलता पर बुढ़ापे में मनोबल न हो तो काम नहीं चलता। मुनिश्री ने प्रेरणा देते हुए कहा- व्यक्ति को उम्र से, ज्ञान से और अनुभव से बड़े बनना अच्छा है पर बुढे नहीं बने। वृद्धावस्था में आरोग्य, बोधि लाभ और अंत में उत्तम समाधि को प्राप्त करने हेतु आज यह संकल्प करें कि मुझे सद्गति में जाना है। उसके लिए कुछ धार्मिक आध्यात्मिक गतिविधि में समय का नियोजन जरूर करें।
मुनिश्री ने युवा वर्ग को प्रेरणा देते हुए कहा घर के बड़े बुजुर्गों के आंख में आंसू ना आए बस इतना सा प्रयास आप लोगों को करना चाहिए यही उनकी आध्यात्मिक सेवा कहलाएगी। विकास महोत्सव के अवसर पर मुनि श्री ने आचार्यश्री तुलसी के विशिष्ट अवदानों को प्रस्तुत किया। नचिकेता मुनि आदित्य कुमार ने गीत का संगान करते हुए वृद्धावस्था में अनासक्त रहने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम में प्रायोजक महावीर इंटरनेशनल के प्रमुख विजयराज कटारिया, विमल चीपड तेरापंथ सभा चेन्नई अध्यक्ष महेंद्र मांडोत, तेरापंथ भवन त्रिप्लीकेन ट्रस्ट अध्यक्ष संतोष धारीवाल, डॉ कमलेश नाहर, गजेंद्र खांटेड मूर्तिपूजक समाज से रविंद्र नाहर, स्थानकवासी समाज से ललित छाजेड़ आदि ने विचार रखें। कवि मनोहर महक ने गांव री गुवाडी नामक गीत की मनमोहक प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का संचालन मंजू गेलडा तथा संपतराज चौरडिया ने किया। आभार ज्ञापन सुरेश संचेती ने किया।