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पर्यूषण महापर्व : भक्ति, साधना और आध्यात्मिकता का संगम
महापर्व के दौरान धर्म आराधना करवाने हेतु उपासिका मधु कटारिया एवं उपासिका सरोज आर. बैद की उपस्थिति रही। प्रथम दिवस खाद्य संयम दिवस तप-साधना के भव्य शुभारंभ के साथ 11 बहनों एवं 4 भाइयों ने उपवास कीया। इसके अतिरिक्त बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने एकासन की साधना की। स्वाध्याय दिवस उपासिका जी ने स्वाध्याय के माध्यम से ज्ञान का विकास और आत्म-चिंतन करने की कला पर अत्यंत सुंदर मार्गदर्शन प्रदान किया। और लोक जैसे कठिन और गूढ़ विषय को सरल और सहज तरीके से समझाया। सामायिक दिवस समता भाव की वृद्धि हेतु भाई-बहनों द्वारा भक्तिभाव से 'पचरंगी सामायिक' की आराधना की गई। वाणी संयम दिवस पर वाणी की पवित्रता और मन की शांति हेतु मौन की 'पचरंगी साधना' संपन्न हुई। व्रत चेतना दिवस पर श्रावकों को अणुव्रत एवं 12 व्रतों का संकल्प दिलाया गया। छोटे-छोटे व्रतों से आत्म-शुद्धि का मार्ग बताते हुए व्रतधारी श्रावक बनने हेतु प्रेरित किया। जप दिवस
अध्यात्मिक तरंगों के बीच 13 घंटे का लयबद्ध अखंड जाप पूर्वक एवं भक्तिभाव से संपन्न हुआ। ध्यान दिवस पर उपासिका मधु कटारिया द्वारा प्रेक्षाध्यान के माध्यम से 20 मिनट का गहन एवं भावपूर्ण ध्यान करवाया गया। संवत्सरी महापर्व के मुख्य दिवस पर अपार भक्ति देखने को मिली। उपासिका बहनों ने भगवान महावीर स्वामी के जीवन-चरित्र का मार्मिक परिचय करवाया। पर्यूषण महापर्व के शुभ अवसर पर ज्ञानशाला के बच्चों ने बहुत ही सुंदर आध्यात्मिक प्रस्तुति दी। साथ ही महिला मंडल की बहनों द्वारा भगवान नेमीनाथ जी के जीवन पर आधारित एक मनमोहक व भावपूर्ण प्रस्तुति दी गई। सायंकालीन संवत्सरी प्रतिक्रमण में लगभग 70 भाई-बहनों की गरिमामयी उपस्थिति रही। प्रात: परस्पर खमतखामणा का सुंदर कार्यक्रम हुआ