क्रोध कम हो, अहंकार झुके तभी सार्थक है पर्युषण

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सिकंदराबाद।

क्रोध कम हो, अहंकार झुके तभी सार्थक है पर्युषण

युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी के सुशिष्य मुनि दीप कुमारजी ठाणा-2 के सान्निध्य में पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व की आध्यात्मिक यात्रा का समापन क्षमापना कार्यक्रम के साथ हुआ। पर्युषण के दौरान महिलाओं में 234 एवं भाइयों में 144 पौषध हुए। इस प्रकार कुल 378 पौषध हुए। पर्युषण महापर्व के दौरान पचरंगी तप का भी आयोजन हुआ तथा 8 एवं 9 की तपस्याएं भी अच्छी संख्या में हुईं। तपस्यारत भाई-बहनों ने उत्साहपूर्वक आराधना करते हुए पर्युषण की साधना को सार्थक बनाया। क्षमापना कार्यक्रम में मुनि दीप कुमारजी ने कहा—'आठ दिनों तक पर्युषण महापर्व की आराधना की। आज उसका सार निकालने का दिन है। जैसे बिलौना किया जाता है तो उससे नवनीत निकलता है, वैसे ही इन आठ दिनों में जो आत्मा का मंथन किया, उसका नवनीत क्षमा है।' मुनिश्री ने कहा कि पर्युषण के आठ दिन केवल धार्मिक क्रियाओं को करने के दिन नहीं हैं, बल्कि स्वयं को देखने, अपनी भूलों को पहचानने और आत्मा पर लगे कर्मों के आवरण को हल्का करने का अवसर हैं। व्यक्ति ने इन दिनों में कितना सामायिक किया, कितना तप किया, कितना स्वाध्याय किया—यह महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी महत्वपूर्ण यह है कि इन साधनाओं से उसके जीवन में कितना परिवर्तन आया। उन्होंने कहा कि यदि पर्युषण के बाद हमारे भीतर क्रोध थोड़ा कम हो जाए, अहंकार थोड़ा झुक जाए, माया और लोभ पर थोड़ा अंकुश आ जाए तथा दूसरों के प्रति मैत्री और क्षमा का भाव बढ़ जाए, तो पर्युषण की साधना सार्थक मानी जा सकती है। मुनिश्री ने भगवान महावीर के संदेश को स्मरण कराते हुए कहा कि सबके प्रति मैत्री का भाव रखना चाहिए। क्षमापना केवल एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह अपने भीतर से वैर और विरोध को निकालने का अवसर है। उन्होंने उपस्थित सभी श्रावक-श्राविकाओं को परस्पर खमतखामणा करने की प्रेरणा दी। मुनिश्री ने कहा कि जीवन में भूल होना स्वाभाविक है, लेकिन अपनी भूल को स्वीकार करना और उसके लिए क्षमा मांगना व्यक्ति के आत्मबल का परिचय है। मुनि दीप कुमारजी ने कहा कि इस अवसर पर क्षमा के सागर आचार्यप्रवर से हम खमतखामणा करते हैं। उन्होंने कहा कि वे महान हैं और हमें क्षमा प्रदान करेंगे। सहवर्ती संत मुनि काव्य कुमारजी ने भी खमतखामणा के अवसर पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में तेरापंथी सभा सिकंदराबाद के अध्यक्ष सुशील संचेती आदि समस्त संस्था के सदस्यों की उपस्थिति रही।