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तेजस्वी नेतृत्व, आगम ज्ञान और उग्र विहार के प्रतीक थे सप्तमाचार्य
युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि हिमांशु कुमार जी एवं मुनि हेमंत कुमार जी के पावन सान्निध्य में तेरापंथ धर्मसंघ के सप्तम आचार्य आचार्यश्री डालगणी जी का 118वां निर्वाण दिवस श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मुनिश्री ने आचार्यश्री डालगणी जी के जीवन एवं व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए उनके तेजस्वी नेतृत्व, आगम ज्ञान, दृढ़ संकल्प, कष्टसहिष्णुता एवं उग्र विहार की चर्चा की। उन्होंने आचार्यश्री डालगणी जी के जीवन से जुड़े प्रसंगों एवं उनकी प्रसिद्ध ‘अदालत’ के प्रसंग का रोचक वर्णन करते हुए उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं को उनके व्यक्तित्व की विशेषताओं से अवगत कराया। आचार्यश्री डालगणी जी ने लगभग बारह वर्षों तक तेरापंथ धर्मसंघ का कुशलतापूर्वक संचालन किया। उनके शासनकाल में संघ के अनुशासन, संगठन और मर्यादा को विशेष मजबूती मिली। उन्होंने कच्छ क्षेत्र में तीन बार प्रभावक यात्राएं कीं और वहां उनके तेजस्वी व्यक्तित्व के कारण उन्हें विशेष सम्मान प्राप्त हुआ। आचार्यश्री डालगणी जी के आदर्शों को स्मरण करने तथा उनके जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश दिया गया।