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ग्रन्थि-विमोचन कैसे हो? आत्मा कर्मों से हल्की कैसे हो? गुरु ने कहा - क्षमा
परम पूज्य युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण जी के मंगल आशीर्वाद तथा मुनि आकाश कुमार जी एवं सहवर्ती मुनि हितेन्द्र कुमार जी के पावन सान्निध्य में आयोजित इस समारोह में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता दर्ज कराई। इस अवसर पर मुनि आकाश कुमार जी ने क्षमा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि, 'शिष्य ने गुरु से पूछा—ग्रन्थि-विमोचन कैसे हो? आत्मा कर्मों से हल्की कैसे हो? गुरु ने उत्तर दिया क्षमा।' उन्होंने कहा कि यदि मन में क्षमाभाव हो तो बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान भी संभव है। क्षमा कायरों का नहीं, बल्कि वीरों का आभूषण है। क्षमा और सकारात्मक भावनाओं का मनुष्य के जीवन एवं स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है। सहवर्ती मुनि हितेन्द्र कुमार जी ने कहा कि 'जो नमना जानता है, वही महान बनता है।' उन्होंने कहा कि क्षमा को एक पर्व के रूप में मनाया जाता हो, ऐसा उदाहरण अन्यत्र देखने को दुर्लभ है। उन्होंने कहा कि हम सौभाग्यशाली हैं कि हमें ऐसा धर्म, ऐसी धरती और ऐसी महान परंपरा प्राप्त हुई है। सभाध्यक्ष कम दुगड़, ट्रस्ट अध्यक्ष राकेश छाजेड़, तेयुप अध्यक्ष सरल पटावरी, महिला मंडल अध्यक्ष मंजु बोथरा ने क्षमायाचना की। मुनि आकाश कुमार जी एवं मुनि हितेन्द्र कुमार जी ने भी उपस्थित सभी श्रावक-श्राविकाओं से क्षमायाचना करते हुए सभी के प्रति आध्यात्मिक मंगलकामना व्यक्त की। संवत्सरी के लगभग 126 श्रावक-श्राविकाओं ने पौषध किया। पूरे समारोह का सुमधुर एवं प्रभावी मंच संचालन दिनेश जी मरोठी ने किया।