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‘तुलसी’ केवल स्मरण नहीं, विराट यात्रा को नमन
आचार्यश्री महाश्रमण जी की सुशिष्या साध्वी संयमलता जी आदि ठाणा-4 के पावन सान्निध्य में विकास महोत्सव श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ साध्वीवृंद द्वारा नवकार मंत्र से हुआ। साध्वी संयमलता जी ने विकास महोत्सव की पृष्ठभूमि एवं उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह महोत्सव केवल एक ऐतिहासिक प्रसंग का स्मरण नहीं, बल्कि आचार्यश्री तुलसी के दूरदर्शी चिंतन, प्रगतिशील दृष्टि और विकास की विराट यात्रा को नमन करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि आचार्यश्री तुलसी ने समय की आवश्यकता को पहचानकर तेरापंथ धर्मसंघ को अनेक नवीन आयाम प्रदान किए और उनके कार्य आज भी संघ, समाज एवं नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा-पुंज बने हुए हैं। साध्वी मार्दव श्री जी ने कुशल संचालन के साथ आचार्यश्री तुलसी को एक सदी के महानायक एवं राष्ट्रीय संत के रूप में स्मरण किया। तेरापंथ महिला मंडल ने ग्यारह आचार्यों की विकास यात्रा को दर्शाते हुए आचार्यश्री तुलसी को समर्पित सुंदर गीतिका प्रस्तुत की। साध्वी मनीषाप्रभा जी ने आचार्यश्री तुलसी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए नारी शक्ति को आगे लाने, रूढ़ियों को दूर करने तथा साध्वी समाज के विकास में उनके योगदान को विशेष रूप से रेखांकित किया। ज्ञानशाला के बच्चों ने आचार्यश्री तुलसी को समर्पित सुंदर संवाद प्रस्तुत किया। साध्वी रौनक प्रभा जी ने कहा कि यद्यपि उन्हें आचार्यश्री तुलसी के प्रत्यक्ष दर्शन का अवसर नहीं मिला, लेकिन उनके साहित्य एवं कार्यों के अध्ययन से उनके विराट व्यक्तित्व को समझने का अवसर मिला—ऐसे संत विरले ही होते हैं। इस अवसर पर तत्त्वज्ञान की परीक्षाओं में उत्तीर्ण प्रतिभागियों को उनके प्राप्त प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। अध्ययन, स्वाध्याय एवं तत्त्वज्ञान के प्रति उनकी रुचि और प्रयासों का उत्साहवर्धन किया गया।