आचार्य तुलसी मानवीय विकास के अवतार पुरुष थे

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आचार्य तुलसी मानवीय विकास के अवतार पुरुष थे

मालवीय नगर स्थित अणुविभा केन्द्र में मुनिश्री तत्त्व रुचि जी 'तरुण' एवं मुनि संभव कुमार जी के सान्निध्य में श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्म संघ के '33वें विकास महोत्सव' का भव्य कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस अवसर पर अणुव्रत समिति जयपुर द्वारा 'अणुव्रत क्रिएटिविटी कॉन्टेस्ट' कार्यक्रम भी रखा गया। जिसमें जयपुर की अनेक स्कूलों के विद्यार्थियों ने शिरकत कर यहाँ आयोजित विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताओं में भाग लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। अणुव्रत समिति जयपुर के अध्यक्ष विनोद वैद, सहमंत्री कमलेश बरड़िया ने बताया कि यह कार्यक्रम अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी के निर्देशन में स्थानीय समिति ने आयोजित किया। इसमें 45 स्कूलों के 225 विद्यार्थियों ने भाग लिया।
श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा जयपुर के तत्त्वाधान में आयोजित 'विकास महोत्सव' कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुनि तत्त्व रुचि जी 'तरुण' ने कहा - आचार्य श्री तुलसी विकास के पर्याय पुरुष थे। वे मानवता के मसीहा और मानवीय विकास के अवतार पुरुष थे। वे कुशल अनुशास्ता, समाज सुधारक, नारी-उद्धारक, धर्म क्रान्ति के कर्णधार आचार्य थे। उन्होंने नारी जागरण, संस्कार-निर्माण, रूढि उन्मूलन और सामाजिक बुराइयों को मिटाने आदि के लिए अथक प्रयास किये। मुनिश्री जी ने बताया कि आचार्य तुलसी ने नैतिकता की प्रतिष्ठा के लिए अणुव्रत आंदोलन, तनाव मुक्ति और मानसिक शांति के लिए प्रेक्षाध्यान, व्यक्तित्त्व निर्माण और शिक्षा जगत की समस्याओं के समाधान हेतु जीवन विज्ञान से दुनिया को त्रिआयामी अवदान प्रदान किये। मुनिश्री संभव कुमार जी ने कहा - आचार्य श्री तुलसी ने विकास के केवल सपने ही नहीं देखे अपितु उन्हें साकार भी किया। वे जैन धर्म के एक बहुत बड़े संगठन के अनुशास्ता होने बावजूद उन्होंने स्वयं को सम्प्रदाय विशेष में कैद नहीं किया। उन्होंने अपना परिचय देते हुए कहा - मैं सबसे पहले मानव हूँ, उसके बाद धार्मिक, जैन और एक पंथ का आचार्य हूँ। उनके इस उदात्त दृष्टिकोण ने उनको व्यापक बना दिया। वे जीवंत धर्म के परिपोषक थे। कार्यक्रम का कुशल संयोजन अणुव्रत समिति मंत्री जयश्री सिद्धा ने किया।