आचार्य श्री तुलसी के योगदान की स्मृति है विकास महोत्सव

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आचार्य श्री तुलसी के योगदान की स्मृति है विकास महोत्सव

दिल्ली। श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, दिल्ली के तत्वावधान में खिलौनी देवी धर्मशाला,पीतमपुरा में आचार्यश्री तुलसी का 33वां विकास महोत्सव मनाया गया। कार्यक्रम मुनिश्री उदित कुमार जी के पावन सान्निध्य में आयोजित हुआ, जिसमें पीतमपुरा सहित दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालुओं ने भाग लिया। आचार्यश्री तुलसी के पट्टोत्सव को आचार्यश्री महाप्रज्ञजी ने ‘विकास महोत्सव’ नाम दिया था।
आचार्यश्री तुलसी की दूरदृष्टि, बहुआयामी व्यक्तित्व और तेरापंथ के विकास में उनके योगदान की स्मृति है विकास महोत्सव। मुनि उदित कुमार जी ने आचार्यश्री तुलसी की दूरदृष्टि और व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा -'आचार्य श्री तुलसी ने तेरापंथ को सीमित दायरे से बाहर निकालकर व्यापक जनसमाज तक पहुँचाने का कार्य किया। उनकी दृष्टि में धर्म केवल मान्यताओं तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन को संस्कारित और समाज को नैतिक दिशा देने वाली चेतना है। इसी दृष्टि के साथ उन्होंने तेरापंथ को एक सर्वव्यापी एवं लोकप्रिय धर्म-संघ के रूप में विकसित करने का प्रयास किया। मुनिश्री ने आगे कहा - आचार्यश्री तुलसी की विशेषता थी कि उन्होंने परंपरा की मूल चेतना को सुरक्षित रखते हुए उसे समय और समाज से जोड़ा। अणुव्रत आंदोलन इसी व्यापक दृष्टि का उदाहरण है, जिसने नैतिक जीवन-मूल्यों को जन-जन तक पहुँचाने का मार्ग प्रशस्त किया। कार्यक्रम का शुभारंभ नमस्कार महामंत्र के उच्चारण से हुआ। प्रवीण बैंगानी ने गीत की प्रस्तुति दी।दिल्ली सभा अध्यक्ष विमल बैंगानी ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन सभा के मंत्री वीरेंद्र जैन ने किया।