पूर्वार्ध चातुर्मास का ऐतिहासिक समापन

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पीतमपुरा।

पूर्वार्ध चातुर्मास का ऐतिहासिक समापन

बहुश्रुत मुनि उदित कुमारजी के उग्रसेन खिलौनी देवी धर्मशाला, पीतमपुरा में सम्पन्न पूर्वार्ध चातुर्मास का भावपूर्ण समापन मंगल भावना समारोह के साथ हुआ। चातुर्मास के दौरान प्राप्त आध्यात्मिक प्रेरणा एवं मार्गदर्शन के प्रति समाज ने कृतज्ञता ज्ञापित की। मंगल भावना समारोह में बहुश्रुत मुनि उदित कुमारजी ने कहा - चातुर्मास केवल एक निश्चित अवधि में होने वाली धार्मिक गतिविधियों का क्रम नहीं, अपितु आत्मचेतना को जागृत करने और जीवन को धर्ममय दिशा प्रदान करने का अवसर है। बहुश्रुत मुनि उदित कुमारजी का खिलोनी देवी धर्मशाला पीतमपुरा से मंगल प्रस्थान कर से स्व.आसकरण आंचलिया के निवास स्थान शास्त्री नगर पधारे। बहुश्रुत मुनिश्री को मंगल विदाई देने के लिए समाज के श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।
शास्त्री नगर में बहुश्रुत मुनिश्री का वहां विराजित साध्वी सुब्रतां जी से आध्यात्मिक मिलन हुआ। इस अवसर पर समाज के गणमान्य एवं विशिष्ट व्यक्तियों ने विचार व्यक्त करते हुए मुनिश्री के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता एवं मंगलभावनाएँ प्रकट कीं। मुनिश्री ने अपने संदेश में आचार्यश्री की आज्ञा, गुरु-निर्देश एवं गुरु इंगित की आराधना को चातुर्मास की साधना का आधार बताते हुए समाज को सामूहिक आध्यात्मिक पुरुषार्थ के साथ चातुर्मास की सफलता में योगभूत बनने की प्रेरणा दी।