दृढ़ संकल्पबल से सधा कठिन मासखमण तप

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बेंगलुरु।

दृढ़ संकल्पबल से सधा कठिन मासखमण तप

गांधीनगर स्थित तेरापंथ सभा भवन में युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की सुशिष्या साध्वी पावनप्रभाजी ठाणा-4 के सान्निध्य में मासखमण तप की अनुमोदना एवं तप अभिनंदन कार्यक्रम आयोजित हुआ। कार्यक्रम में साध्वीश्री ने तप, त्याग एवं आत्मशुद्धि का प्रेरणादायी संदेश देते हुए रामायण की उक्ति के माध्यम से तपस्या एवं आध्यात्मिक साधना के महत्व को रेखांकित किया। इसी दौरान साध्वी श्री जी ने कहा अपनी दुबली-पतली काया के बावजूद बहन नम्रता पितलिया ने दृढ़ आत्मबल, संकल्पबल एवं तप के प्रति समर्पण का परिचय देते हुए कठिन मासखमण तपस्या की आराधना की।
इस अवसर पर बहन नम्रता पितलिया द्वारा की जा रही मासखमण तपस्या की विशेष अनुमोदना की गई। साध्वी आत्मयशाजी, साध्वी उन्नतयशाजी एवं साध्वी रम्यप्रभाजी ने सामूहिक गीत का संगान कर तपस्विनी के तप की अनुमोदना की। पारिवारिकजनों के साथ टी. दासरहल्ली महिला मंडल एवं तेरापंथ सभा की ओर से भी तपस्या की अनुमोदना एवं उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने तपस्विनी के प्रति मंगलभाव व्यक्त किए। तेरापंथ सभा की ओर से मंत्री सुभाषचंद्र पोखरणा ने तप अभिनंदन पत्र का वाचन करते हुए मंगलकामना की कि यह तपस्या तपस्विनी के लिए कर्मों की निर्जरा, आत्मशुद्धि एवं आत्मकल्याण का माध्यम बने तथा उनके जीवन में आध्यात्मिक ऊर्जा, संयम एवं साधना की निरंतर वृद्धि हो। इस अवसर पर साध्वीप्रमुखाजी के संदेश का वाचन सभा सहमंत्री राजेंद्र बैद ने किया। संचालन सभा मंत्री सुभाषचंद्र पोखरणा ने किया।