लौकिक दान कर्तव्य, लोकोत्तर दान मुक्ति का मार्ग

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मण्डिया, कर्नाटक।

लौकिक दान कर्तव्य, लोकोत्तर दान मुक्ति का मार्ग

अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद द्वारा निर्देशित भिक्षु दर्शन प्रशिक्षण कार्यशाला मण्डिया तेरापंथ युवक परिषद द्वारा तेरापंथ भवन के प्रांगण में आयोजित हुई। उपासिका ललिता बैद ने कहा की आचार्य श्री भिक्षु ने आचार क्रांति की, विचार क्रांति की। सही तत्व को गलत तरीके से पढ़ा जाता है उसकी क्रांति की। जनमानस गलत अवधारणा में जी रहा था आचार्य श्री भिक्षु ने भगवान महावीर के सिद्धांतों को ही सम्यक रूप से प्रस्तुत किया। लौकिक लोकोत्तर की भेद रेखा को व्यक्त किया। उपासिक कांता लोढ़ा ने बताया कि सम्यकत्व को कायम रखने के लिए दृष्टिकोण सही होना जरूरी है। स्वामी जी ने आगम वाणी के आधार पर विचार दर्शन, सिद्धांत प्रस्तुत किए। उनके विचार अध्यात्मवादी थे। आचार्य भिक्षु ने लौकिक लोकोत्तर के मिश्रण से व्यक्ति अज्ञानता में भटक कर मिथ्यात्व में जी रहा था। उन्होंने लौकिक लोकोत्तर की भेद रेखा का स्पष्ट चिंतन दिया।दान-दया का यथार्थ रूप बताते हुए कहा कि पाप के आचरण से अपनी आत्मा को बचाना दया है।