संस्थाएं
संयम जीवन में गुरुदृष्टि की आराधना सर्वोपरि
आचार्य भिक्षु समाधि स्थल संस्थान में मुनि सुरेशकुमारजी 'हरनावां' के सान्निध्य में दीक्षार्थी जहान बेताला सूरत का मंगल भावना का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुनि सुरेशकुमारजी 'हरनावां' ने मंगल आशीर्वाद प्रदान करते हुए कहा - मानव जीवन में संयमी बनना सर्वश्रेष्ठ कार्य है। पूर्व अर्जित शुभ कर्मों के संयोग से चारित्र धर्म की प्राप्ति होती है। संयम जीवन में सेवा-समर्पण और अनुशासन के साथ गुरुदृष्टि की आराधना से जीवन सफल होता है।
इस अवसर पर मुनि जितेन्द्रकुमारजी ने प्रेरणा प्रदान करते हुए संयम जीवन को उज्ज्वलतम बनाने की बात कही। मुनि चैतन्य कुमारजी 'अमन' ने संयम जीवन को श्रेष्ठ सर्वोत्तम बनाने में अपनी श्रम और शक्ति का उपयोग करने तथा गुरुदृष्टि आराधना करने का लक्ष्य रखते हुए गीत का संगान किया। कार्यक्रम में दीक्षार्थी जहान बेताला ने अपनी भावना व्यक्त करते हुए आचार्यश्री महाश्रमणजी के प्रति आभार व्यक्त किया। मुनि गिरिशकुमारजी, मुनि अनुशासन कुमारजी, संस्थान के उपाध्यक्ष उत्तमचंद सुखलेचा, दीक्षार्थी की मातुश्री लताशा बेताला, खिंवाड़ा से सुरेश सोलंकी व्यवस्थापक महावीरसिंह ने अपने विचार प्रस्तुत किए। इस मौके पर बी. के. कल्याणसिंह, श्यामसुन्दर, अणुव्रत समिति के अध्यक्ष प्रकाश परिहार आदि श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित थे। भिक्षु समाधि स्थल संस्थान सिरियारी की ओर से दीक्षार्थी जहान बेताला को दुपट्टा व भिक्षु चित्र प्रदान करते हुए बहुमान किया गया।