आत्मा से आत्मा को देखने की वैज्ञानिक साधना है प्रेक्षाध्यान

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कांदिवली।

आत्मा से आत्मा को देखने की वैज्ञानिक साधना है प्रेक्षाध्यान

युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की विदुषी शिष्या शासनश्री साध्वी विद्यावतीजी 'द्वितीय' ठाणा 5 के सानिध्य में प्रेक्षाध्यान दिवस के अवसर पर प्रेक्षाध्यान कार्यशाला आयोजित की गई। नमस्कार महामंत्र के उच्चारण से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। शासनश्री साध्वी विद्यावतीजी ने कहा - तेरापंथ धर्मसंघ के नवमें आचार्य गुरुदेव तुलसी की प्रेरणा से आचार्य महाप्रज्ञ ने जैन आगमों में यत्र तत्र उपलब्ध ध्यान पद्धतियों का तुलनात्मक अध्ययन कर एक परिष्कृत वैज्ञानिक विधि का आविष्कार किया। उस पद्धति का नाम रखा गया प्रेक्षाध्यान। प्रेक्षा का अर्थ है विशेष रूप से देखना। आत्मा से आत्मा को देखना।
साध्वी प्रियवंदाजी ने कहा - प्रेक्षाध्यान दिवस मनाने का उद्देश्य है जीवन एवं स्वभाव का रूपांतरण। पारसमल दुगड़ ने ध्यान की संक्षिप्त जानकारी देते हुए श्वास प्रेक्षा का प्रयोग करवाया व जीवनोपयोगी कई महत्त्वपूर्ण सूत्र भी बताये। शांतिलाल कोठारी ने प्रेक्षाध्यान को एक अनिवार्य अंग बताया। विमला दुगड़ ने नमस्कार महामंत्र का रंग एवं चैतन्य केंद्रों के साथ ध्यान का प्रयोग करवाया। साध्वी प्रेरणाश्री ने प्रेक्षा गीत के द्वारा मंगलाचरण किया। कार्यक्रम का संचालन साध्वी प्रियंवदा जी ने किया।