विवेक से ही परिवार में बनता है मैत्री और समता का वातावरण

संस्थाएं

विले पार्ले।

विवेक से ही परिवार में बनता है मैत्री और समता का वातावरण

अखिल भारतीय महिला मंडल के निर्देशन अनुसार विले पार्ले महिला मंडल द्वारा अंधेरी महिला मंडल के साथ युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण जी की सुशिष्या साध्वी राकेश कुमारी जी, साध्वी मलयविभा जी, साध्वी विपुलयशा जी एवं साध्वी चेतस्वीप्रभा जी के सान्निध्य में ‘विवेगे धम्मे माहिये’ विषय पर आधारित क्विज़ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ साध्वी राकेश कुमारी जी द्वारा नवकार मंत्र के उच्चारण से हुआ। प्रतियोगिता के लिए चार ग्रुप—विवेक, अहिंसा, दीक्षा एवं अपरिग्रह—बनाए गए। चारों ग्रुप से नारी लोक में प्रकाशित प्रश्नोत्तरों पर आधारित प्रश्न पूछे गए। साध्वी विपुलयशा जी ने प्रश्नोत्तरी का संचालन किया। इस अवसर पर साध्वी राकेश कुमारी जी ने कहा कि ‘विवेगे धम्मे माहिये’ आगम का महत्वपूर्ण वाक्य है, जिसका अर्थ है—विवेक में ही धर्म है। साधु-संतों के साथ-साथ गृहस्थ जीवन में भी विवेक अत्यंत आवश्यक है। विवेकपूर्ण व्यवहार से परिवार में मैत्री, करुणा, समता एवं अहिंसा का वातावरण निर्मित होता है। उन्होंने कहा कि विवेक केवल विचार नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला और जीवनशैली को सही दिशा देने वाला तत्व है। साध्वी श्री जी ने दैनिक जीवन में भी विवेक अपनाने की प्रेरणा देते हुए कहा कि रसोई में स्वच्छता, अनाज एवं सामग्री की सार-संभाल से लेकर घर में उपलब्ध वस्तुओं के उचित उपयोग तक जागरूकता आवश्यक है। आवश्यकता से अधिक संग्रह करने के बजाय अपरिग्रह की भावना से अनावश्यक वस्तुओं को जरूरतमंदों तक पहुँचाना और उपलब्ध सामग्री की सार-संभाल करना भी विवेक का ही रूप है। विवेक परिवार में व्यवहार, साधु-संतों के प्रति विनय तथा समाज के प्रत्येक व्यक्ति के साथ मैत्रीपूर्ण आचरण करना सिखाता है। उन्होंने कहा कि विवेक आत्मकल्याण के मार्ग को प्रशस्त करता है।