'पैसों के लिफाफे से बड़ा है त्याग का उपहार'

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'पैसों के लिफाफे से बड़ा है त्याग का उपहार'

मुनि आलोक कुमार जी के सान्निध्य में गदग तेरापंथ भवन में कुसुम जीरावला का मासखमण के तपस्या का अभिनंदन समारोह रखा गया। डॉ मुनि आलोक कुमार जी ने कहा- आज का युग होटल का युग है जहां रसना पर कंट्रोल करना मुश्किल है। संवत्सरी के जाते ही होटल के दरवाजे पर भीड़ लग जाती हैं। साहस करके कुसुम जीरावला ने रसना पर कंट्रोल करते हुए मासखमण की तपस्या करके जीरावला कुल पर कलश चढ़ाया है। गदग में इस बार चार चातुर्मास गतिमान हैं उसमें पहला मासखमण कुसुम जीरावला ने किया। मुनिश्री ने कहा की तपस्या के उपलक्ष में पैसों का लिफाफा ना देते हुए त्याग का लिफाफा दे। मुनि हिम कुमार जी ने कहा तपस्या करना आसान नहीं है। मुनिश्री उत्साह साहस व हिम्मत जागते हैं। साध्वीप्रमुखा श्री जी का संदेश गौतम जीरावला ने वाचन किया। कार्यक्रम का संचालन मुनि हिम कुमार जी ने किया।