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तप, जप और मैत्री का संगम - पर्युषण
श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा-नागपुर के तत्वावधान में नौ दिवसीय पर्युषण पर्व का आध्यात्मिक, ज्ञानवर्धक एवं साधनामय आयोजन किया गया। तेरापंथ धर्मसंघ के परम पूज्य आचार्यश्री महाश्रमण जी के निर्देशन एवं केंद्र से प्राप्त निर्देशानुसार उपासक गणपतलाल जैन एवं उपासक दिनेश बापना का विशेष मार्गदर्शन नागपुर श्रावक समाज को मिला। पर्युषण पर्वाराधना में भगवान महावीर के जीवन चरित्र की व्याख्या एवं उनके तीर्थंकर बनने तक की यात्रा सहित विभिन्न धार्मिक विषयों की सरल एवं प्रभावशाली व्याख्या की। 9 दिन क्रमशः खाद्य संयम दिवस/ स्वाध्याय दिवस/ सामायिक दिवस/वाणी संयम दिवस/ व्रत चेतना दिवस/जप दिवस/ध्यान दिवस/संवत्सरी महापर्व के पश्चात मैत्री दिवस का आयोजन हुआ। तपस्या के इस पावन क्रम में उपवास एवं विविध तप की आराधना करने वाले सभी तपस्वियों की हृदय से अनुमोदना की गई। तपस्वियों के आत्मबल, दृढ़ संकल्प एवं आध्यात्मिक साधना को नमन करते हुए समाजजनों ने उनके प्रति मंगलभावना व्यक्त की। उपासक जी ने गणाधिपति पूज्य गुरुदेव आचार्यश्री तुलसी द्वारा दिए गए अणुव्रत अवदान के महत्व को तथा बारह व्रतो को सरलतापूर्वक समझाते हुए उन्होंने सभी को बारहव्रती बनने के लिए प्रेरित किया। अनेक श्रावकों ने बारह व्रत के प्रति अपने संकल्प व्यक्त किये। आचार्यश्री महाप्रज्ञ जी द्वारा दिए गए अवदान प्रेक्षा ध्यान का निरंतर प्रयोग करके किस प्रकार व्यक्ति अपने जीवन में शांति स्थापित कर सकता है इसकी प्रेरणा दी। एवं जप दिवस पर नमस्कार महामंत्र का अखंड जाप का क्रम भी चला।