तपस्या तेज, ओज व प्राणऊर्जा का संवर्धन करती है

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अहमदाबाद।

तपस्या तेज, ओज व प्राणऊर्जा का संवर्धन करती है

साध्वी अणिमाश्री जी के सानिध्य में शाहीबाग तेरापंथ भवन में चन्द्रा देवी चोपड़ा ने तेहत्तर (73) दिन की तपस्या एवं रेखा कोठारी ने तीस (30) दिन की तपस्या का प्रत्याख्यान किया। विशाल परिषद ने 'ॐ अर्हम्' की हर्ष ध्वनि के साथ तपस्विनी बहनों के तप की अनुमोदना की। साध्वी अणिमाश्री जी ने परिषद को संबोधित करते हुए कहा - 'तपस्या वह संजीवनी बूटी है, जिससे भव-भ्रमण रुक जाता है। तपस्या तेज, ओज व प्राणऊर्जा का संवर्धन करने वाली है। तपस्या कर्म शरीर को तनु कर सकती है। तपस्या से तपस्वी का आभामंडल तेजोदीप्त बनता है। तपस्या सत्यं शिवं सुंदरं के भव्य महल में प्रविष्ट कराने वाला द्वार है। चातुर्मास तपस्या की सीजन है। जिनका क्षयोपशम प्रबल होता है, वो ही तप के रथ पर आरूढ़ होकर आत्मनगर की सैर करता है'।
साध्वी श्री ने कहा - आत्मबल, मनोबल, संकल्पबल व परिवार के सहयोग-बल से ही तपस्वी तपस्या कर सकते हैं। साधु-साध्वियों की प्रेरणा भावों को गति प्रदान करती है। गुरु के आशीर्वाद व ऊर्जा से तपस्वी अपनी भावना को साकार करते हैं। चन्द्रादेवी चोपड़ा ने तेहत्तर दिन की तपस्या कर नए इतिहास का सृजन किया है। यह इनका ग्यारहवां मासखमण है। हम कामना करते हैं, ये और आगे बढ़ें। रेखा कोठारी का यह दूसरा मासखमण है। इनकी सासु-माँ शान्ता कोठारी ने दो सौ ग्यारह (211) दिन की तपस्या कर तेरापंथ में तप की स्वर्णिम ख्यात बनाई है। डॉ. साध्वी सुधाप्रभा जी ने मंच का कुशल व प्रभावी संचालन किया। साध्वी कणिकाश्री जी, डॉ. साध्वी सुधाप्रभा जी, साध्वी समत्वयशा जी व साध्वी मैत्रीप्रभा जी ने भावपूर्ण तप-गीत के द्वारा अनुमोदना की। सभाध्यक्ष राकेश सिपानी एवं महिला मंडल अध्यक्ष सुशीला खतंगने साध्वी प्रमुखश्री जी के संदेश का वाचन किया।