संयम, स्वाध्याय और सामायिक की त्रिवेणी

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पीतमपुरा, दिल्ली

संयम, स्वाध्याय और सामायिक की त्रिवेणी

परम पूज्य आचार्यश्री महाश्रमणजी की आज्ञा से पीतमपुरा, दिल्ली में चातुर्मासरत बहुश्रुत मुनि उदित कुमारजी स्वामी के सान्निध्य में पर्युषण महापर्व 2026 श्रद्धा एवं साधना के साथ संपन्न हुआ। आठों दिवसों में श्रावक-श्राविकाओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही।
प्रथम दिवस — खाद्य संयम दिवस
आहार में संयम एवं इंद्रिय-निग्रह की प्रेरणा देते हुए मुनिश्री ने कहा— 'भोजन आवश्यकता है, स्वाद तृष्णा। दोनों का अंतर समझना ही संयम है।'
द्वितीय दिवस — स्वाध्याय दिवस
मुनि उदित कुमार जी ने कहा— 'स्वाध्याय ग्रंथों को पढ़ना ही नहीं, स्वयं को पढ़ना भी है स्वाध्याय के माध्यम से आत्मचिंतन भी संभव है।'
तृतीय दिवस — सामायिक दिवस
आज मुनिश्री के सान्निध्य में अभिनव सामायिक का आयोजन हुआ, जिसके अंतर्गत करीब 568 अभिनव सामायिक हुई। मुनिश्री ने अभिनव सामायिक आराधना के माध्यम से समता एवं आत्मनिरीक्षण का संदेश दिया और कहा— 'सामायिक कुछ समय संसार से नहीं, स्वयं से जुड़ने का अवसर है।'
चतुर्थ दिवस — वाणी संयम दिवस
मुनिश्री ने कहा— 'शब्द जोड़ भी सकते हैं और तोड़ भी; इसलिए वाणी में विवेक आवश्यक है।' मुनिश्री ने मितभाषिता एवं मधुर वाणी के महत्व पर प्रकाश डाला।
पंचम दिवस — व्रत चेतना दिवस
व्रतों के प्रति जागरूक करते हुए मुनिश्री ने कहा— 'व्रत बंधन नहीं, आत्मबल को जागृत करने वाला संकल्प है।'
षष्ठ दिवस — जप दिवस
जप के माध्यम से एकाग्रता एवं भावशुद्धि की प्रेरणा दी गई।मुनिश्री ने कहा— 'मंत्र के साथ जब मन जुड़ता है, तभी जप साधना बनता है।'
सप्तम दिवस — ध्यान दिवस
ध्यान के विविध प्रयोगों के माध्यम से अंतर्मुखी साधना की प्रेरणा देते हुए मुनिश्री ने कहा— 'ध्यान बाहर से भीतर की यात्रा है; यही आत्मजागरण का मार्ग है।'
संवत्सरी महापर्व — क्षमा और आत्मावलोकन का पर्व
संवत्सरी पर सामायिक, प्रतिक्रमण, तप एवं स्वाध्याय के माध्यम से आत्मावलोकन किया गया। मुनिश्री ने भगवान महावीर के जीवन-प्रसंगों से अहिंसा, संयम एवं क्षमा की प्रेरणा दी। मुनिश्री ने कहा— 'संवत्सरी दूसरों की भूल देखने से पहले स्वयं को देखने का अवसर है। क्षमा से मन का वैर समाप्त होता है।' संवत्सरी महापर्व के अवसर पर मुनि रम्य कुमार जी एवं मुनि ज्योतिर्मय कुमार जी ने भी विभिन्न विषयों पर उद्बोधन दिया।
क्षमापना दिवस
दिल्ली समाज की विभिन्न संस्थाओं की ओर से समाज के प्रति क्षमापना के भावों की अभिव्यक्ति दी गई इस समारोह में केंद्रीय संस्थानों के भी गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे ।
ज्ञातव्य बिंदु
पर्युषण काल में अखंड जप में पीतमपुरा सहित शालीमार बाग, मानसरोवर गार्डन, कीर्ति नगर, त्रि नगर, शास्त्री नगर, उत्तर दिल्ली तेरापंथ महिला मंडल, अरिहंत नगर ने सहभागिता दर्ज की।
प्रतिदिन कार्यक्रम का मंगलाचरण जप का दायित्व संभालने वाली संस्थाओं की महिलाओं द्वारा हुआ।
संवत्सरी पर खिलौनी देवी धर्मशाला परिसर में करीब १०८ पौषध हुए। ‘विघ्न निवारण तेले’ में ७६ तेले हुए, जिनमें 11 व्यक्तियों ने अठाई एवं आगे की तपस्या की ओर कदम बढ़ाया। प्रतिदिन श्रद्धालुओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
पर्युषण के इस आठ दिवस की व्यवस्थापन का कार्य श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा पीतमपुरा द्वारा संचालित किया गया।