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जीवन को संयमित और अनुशासित बनाने की आचार-संहिता है अणुव्रत
अणुव्रत अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी के विद्वान सुशिष्य मुनि आनंद कुमार जी 'कालू' एवं सहवर्ती मुनि विकास कुमार जी के पावन सान्निध्य एवं अणुव्रत विश्व भारती सोसाइटी के तत्वावधान में अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के प्रथम दिवस को अणुव्रत प्रेरणा दिवस एवं अणुव्रत गीत महासंगान का आयोजन अणुव्रत समिति द्वारा श्रद्धा एवं उत्साह के साथ तेरापंथ धर्मस्थल में किया गया। कार्यक्रम का संयोजन सहमंत्री प्रथम डॉ. सारिका दुगड़ ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुनिश्री के महामंत्रोच्चार के साथ हुआ। मुनि आनंद कुमारजी 'कालू' ने अपने उद्बोधन में कहा कि अणुव्रत केवल कोई संकल्प नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक आचार-संहिता है। वर्तमान समय में मनुष्य के सामने अनेक प्रकार की चुनौतियां हैं। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय को अणुव्रत के संदेश को अपने जीवन में उतारने तथा दूसरों तक पहुंचाने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम में मुनि विकास कुमारजी ने अणुव्रत गीत का महासंगान करवाया। समिति की मंत्री रंजना बरड़िया ने बताया कि अणुव्रत आचार संहिता का वाचन अणुविभा की कार्यकारिणी सदस्य एवं समिति के निवर्तमान अध्यक्ष बजरंग बैद एवं समिति के संरक्षक सदस्य कैलाश काबरा ने किया।
अणुव्रत समिति के अध्यक्ष संजय चौरड़िया (JTN प्रतिनिधि) ने अपने वक्तव्य में कहा कि अणुव्रत आज के समय में समाज को नैतिक दिशा देने वाला महत्वपूर्ण अभियान है। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित स्थानीय वार्ड पार्षद प्रमोद स्वामी ने अणुव्रत समिति के कार्यों की सराहना की। कार्यक्रम में उपस्थित श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, गुवाहाटी के अध्यक्ष रितेश खटेड़, सभी संघीय संस्थाओं के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने अणुव्रत के आदर्शों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।