तप से संभव है गृह शांति

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उत्तर हावड़ा।

तप से संभव है गृह शांति

युगप्रधान आचार्याश्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि जिनेश कुमार जी ठाणा-3 के सान्निध्य में प्रेम लता बैद के मासखमण तप का अभिनंदन समारोह योगक्षेम विहार के योगक्षेम सभागार में उत्तर हावड़ा जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा द्वारा आयोजित किया गया। इस अवसर पर उपस्थित धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि जिनेश कुमार जी ने कहा — धर्म जीवन का पाथेय है। व्यक्ति के पास धर्म रूपी पाथेय पास में होने से जीवन यात्रा का सफर सुखमय बन जाता है। धर्म का थोड़ा सा पालना भी महाभय से बचा लेता है।
धर्म का पथ है ज्ञान, दर्शन, चारित्र और तप अथवा दान, शील, तप, भावना। तप से आत्मा परिशुद्ध होती है। इंद्रियों और मन को वश में करना ही तप है। तप का मूल उद्देश्य जीवन जागरण, आत्म शोधन और बंधन मुक्ति है। इसके साथ-साथ मानसिक एकाग्रता, इंद्रिय दमन, कषाय उपशमन और स्वभाव परिवर्तन ये बातें तपस्या द्वारा फलित होते हैं। तप से कर्म शांत होने में ग्रह शांति होती है। तप के प्रभाव से अस्थिर वक्र ऋजु शैतान भगवान बन जाता हैं। तप वही कर सकता है जिसका मनोबल, धृतिबल व संहतन मजबूत होता है। जो तप में कषाय, विषय, आहार का त्याग होता है वह उपवास होता है। आसक्तियों को छोड़कर मांग को अस्वीकार करना तप है।
आज प्रेम लता बैद मासक्षमण तप का प्रत्याख्यान करने जा रही हैं। यह तपस्विनी श्राविका है। इनका यह छठा मासक्षमण तप है। इनके पति जुगराज बैद भी सेवाभावी व तपस्वी श्रावक हैं। तपस्वी प्रेम लता बैद व बैद परिवार के प्रति खुब-खुब मंगल कामना। कार्यक्रम का शुभारंभ मुनि कुणाल कुमार के मंगलाचरण से हुआ। स्वागत भाषण उत्तर हावड़ा जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा के अध्यक्ष संदीप डागा ने दिया। साध्वी प्रमुखा विश्रुतविभा जी के संदेश का वाचन मुख्य न्यासी जेठमल जी सामसुखा ने किया। इस अवसर पर बैद परिवार की बहनों ने तप अनुमोदना गीत का संगान किया। टाॅलीगंज सभा के अध्यक्ष सुशील कोठारी ने तप अनुमोदना में अपने विचार व्यक्त किए। आभार ज्ञापन सभा मंत्री विनीत कोठारी ने किया। कार्यक्रम का संचालन मुनि परमानंद ने किया। मुनि श्री द्वारा तपस्विनी प्रेम लता बैद को २७ दिन की तपस्या का प्रत्याख्यान करवाया गया। सभा द्वारा तपस्विनी बहन को साध्वी प्रमुखा श्री जी का संदेश भेंट किया गया।