बाल वैरागी से बने युग निर्माता : आचार्य कालूगणी

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कांकरिया मणिनगर

बाल वैरागी से बने युग निर्माता : आचार्य कालूगणी

तेरापंथ भवन कांकरिया मणिनगर में शासनश्री साध्वी रामकुमारी जी आदि ठाणा-4 के सानिध्य में आचार्य श्री कालूगणी की वार्षिक पुण्यतिथि मनाई गई। साध्वी श्री आत्मा प्रभा जी ने बताया कि आचार्य कालूगणी जैन धर्म के श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ के आठवें आचार्य थे।उनका जन्म: 15 फरवरी 1877 (विक्रमी संवत 1933) को राजस्थान के छापर कस्बे में हुआ था।आपके पिता का नाम श्री मूलचंद जी चोपड़ा और माता का नाम श्रीमती छोगानी था। बाल्यावस्था में ही, मात्र 10 वर्ष की आयु में, आपने अपनी माता के साथ संवत 1944 आश्विन शुक्ला तृतीया को पंचम आचार्य मगवागणी के पास दीक्षा ग्रहण की। आचार्य डालचंद जी द्वारा विक्रम संवत 1966 में आपको बीदासर में तेरापंथ का अष्टम आचार्य नियुक्त किया गया।
आपके आचार्य काल में तेरापंथ धर्मसंघ का प्रचार-प्रसार दक्षिण भारत तक पहुँचा।आपने संस्कृत भाषा और जैन साहित्य के प्रचार-प्रसार में विशेष योगदान दिया। लगभग 27 वर्षों तक संघ का कुशल नेतृत्व करने के बाद, संवत 1993 भाद्रपद मास की छठी को मेवाड़ के गंगापुर (भीलवाड़ा) में आपका महाप्रयाण हुआ। साध्वीवृंद द्वारा सामूहिक गीतिका का संगान किया गया।