श्रावक जिनशासन का अभिन्न अंग सादगी और आस्था से जीए जीवन

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श्रावक जिनशासन का अभिन्न अंग सादगी और आस्था से जीए जीवन

युगप्रदान आचार्यश्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि जिनेश कुमार जी ठाणा-3 के सान्निध्य में उपनगर क्षेत्रीय श्रावक-श्राविका सम्मेलन (लिलुआ, बाली-बेलूड़, उत्तरपाड़ा, हिन्दमोटर, रिसड़ा) का आयोजन उत्तर हावड़ा श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा द्वारा योगक्षेम विहार के योगक्षेम सभागार में आयोजित किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महासभा के कोषाध्यक्ष मदनलाल मरोठी विशेष रूप से उपस्थित थे । प्रवचन सत्र के अवसर पर उपस्थित धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि जिनेश कुमार जी ने कहा श्रावक जिनशासन का अभिन्न अंग है। श्रावक वह होता है जो श्रमणों की उपासना करता है, जो श्रमशील है, विवेक संपन्न है और जो अपने कर्तव्य के प्रति जागरूक व क्रिया शील है। श्रावक अपने दायित्व के प्रति जागरूक रहकर शासन की सेवा करे। श्रावक हिंसा, भोग, विलासिता, आडंबर, प्रदर्शन से मुक्त होकर स्वस्थ जीवन जीए। देव, गुरु, धर्म के प्रति आस्था रखे। धर्म से विमुख न बने, धर्म की आराधना करे, सादगी का जीवन जीए। संघ व संघपति के प्रति आस्था रखे।
मुनि ने आगे कहा- संघ आश्वासन देने वाला है, संघ विश्वास है, संघ शीत घर के समान है। संघ माता-पिता के समान है, इसलिए संघ की शरण ले । संघ को छोड़ने वाला कभी सुखी नहीं होता है। हमें मनुष्य जन्म मिला है, जिनशासन मिला है, तेरापंथ धर्म संघ मिला है और आचार्य महाश्रमण जी जैसे गुरु मिले हैं। सच्ची आस्था, स्थिर श्रद्धा, उज्ज्वल आचार व्यवस्था, सर्वमान्य अनुशासन शैली, एक आचार्य का नेतृत्व ये तेरापंथ पांच घटक तत्व हैं। श्रावक आहार शुद्धि, व्यसनमुक्त का जीवन जीए। श्रावक हर परिस्थिति में समता संतुलित रहकर अपने क्षेत्रों में धार्मिक जागरण करते रहें, यही आध्यात्मिक मंगल कामना करता हूँ।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुनि कुणाल कुमार जी के मंगलाचरण से हुआ। स्वागत भाषण उत्तर हावड़ा श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा के अध्यक्ष संदीप डागा ने दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जैन श्वेतांबर तेरापंथी महासभा के कोषाध्यक्ष मदनलाल मरोठी ने संगठन के महत्व व विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा- एक आचार्य, एक विधान, एक मर्यादा और एक अनुशासन —यही हमारी संगठन की विशिष्ट पहचान है। हमारा दायित्व केवल नई पीढ़ी को संगठन से जोड़ना नहीं है, हमें उन्हें सहभागी व संस्कारी बनाना है।
आभार ज्ञापन सभा के मंत्री विनीत कोठारी ने किया। कार्यक्रम का संचालन मुनि परमानंद ने किया।
द्वितीय प्रशिक्षण सत्र में महासभा के कार्यकारिणी सदस्य व क्षेत्रीय प्रभारी नवीन दुगड़, उपासक महावीर प्रताप दुगड़, उपासक सुशील बाफणा ने उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं को विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण ज्ञान दिया। संचालन महावीर प्रताप दुगड़ ने किया।
तृतीय सत्र में उपनगरीय क्षेत्रों की संस्थाओं के पदाधिकारियों व सदस्यों ने अपने-अपने क्षेत्रों में चल रही गतिविधियों की जानकारी प्रदान की। उपासिका चंद्रकांता पुगलिया ने अपने विचार व्यक्त किये। मुनि जिनेश कुमार जी व मुनि परमानंद जी ने धर्मसंघ की गतिविधियों, संस्कारों व परंपराओं की जानकारी प्रदान करते हुए गुरु दर्शन, पर्युषण पर्व की क्षेत्र में सम्यक आराधना व चारित्र आत्माओं की उपासना के संदर्भ में विविध प्रेरणाएं प्रदान की। इस सम्मेलन में लिलुआ, बाली-बेलूड़, उत्तरपाड़ा, हिन्दमोटर, कोननगर, रिसड़ा से लगभग 140 श्रावक-श्राविकाओं ने हिस्सा लिया।