प्रशिक्षिकाएँ भावी पीढ़ी में संस्कारों के बीज संजोती हैं

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गांधीनगर, बेंगलुरु।

प्रशिक्षिकाएँ भावी पीढ़ी में संस्कारों के बीज संजोती हैं

श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथ सभा, गांधीनगर, बेंगलुरु के तत्वावधान में, आचार्यश्री महाश्रमण जी की सुशिष्या साध्वी पावनप्रभा जी ठाणा-4 के पावन सान्निध्य में विज्ञ, विशारद एवं स्नातक की ज्ञानशाला प्रशिक्षिकाओं की लिखित परीक्षा का सफल आयोजन किया गया। परीक्षा का शुभारंभ साध्वी पावनप्रभा जी के मंगल पाठ से हुआ। इस अवसर पर साध्वी उन्नतयशा जी, साध्वी आत्मयशा जी एवं साध्वी रम्यप्रभा जी का भी पावन सान्निध्य प्राप्त हुआ। दक्षिण कर्नाटक आंचलिक संयोजक बिनोद कोठारी, सह आंचलिक सह संयोजक सुरेश बरड़िया सभाअध्यक्ष प्रकाश बाबेल की गरिमामयी उपस्थिति में प्रश्नपत्र खोला गया।
इस लिखित परीक्षा में कुल 25 बहनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। यह परीक्षा प्रशिक्षिकाओं के ज्ञान, समर्पण एवं शिक्षण कौशल को परखने के साथ-साथ उनके आध्यात्मिक एवं बौद्धिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रही।ज्ञानशाला प्रशिक्षिकाएँ भावी पीढ़ी में संस्कार, नैतिक मूल्यों एवं जैन दर्शन के बीज रोपित करने का महत्वपूर्ण दायित्व निभाती हैं। ऐसी परीक्षाएँ उनके ज्ञान को परिष्कृत करने, आत्मविश्वास बढ़ाने तथा ज्ञानशाला के शैक्षणिक स्तर को और अधिक सुदृढ़ बनाने में सहायक सिद्ध होती हैं