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दायित्व बोध और सजगता से ही संभव है जीवन निर्माण
केल्लीस में विराजित साध्वी उदितयशा जी ठाणा-4 के पावन सान्निध्य में तेरापंथी सभा द्वारा ज्ञानशाला प्रशिक्षिकाओं के लिए एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में लगभग 40 प्रशिक्षिकाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
'IT'S BETTER TO SLEEP THAN TO SLIP' कार्यक्रम का शुभारंभ साध्वी संगीत प्रभा जी ठाणा के मंगल उद्बोधन से हुआ। उन्होंने कहा कि हम सभी अपने जीवन में कभी प्रशिक्षक तो कभी विद्यार्थी की भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने मां और सास की तुलना एक प्रशिक्षक से करते हुए कहा कि जिस प्रकार एक मां अपने बच्चे को पाल-पोसकर बड़ा करती है, उसी प्रकार एक सास अपनी बहू को परिवार एवं घर की जिम्मेदारियां निभाना सिखाती है।
उन्होंने शिक्षा और ज्ञान के बीच के अंतर को भी सरल एवं प्रभावी ढंग से समझाया। साध्वी उदितयशा जी ठाणा-4 ने अपने मंगल उद्बोधन में सभी प्रशिक्षिकाओं की सराहना करते हुए कार्यशाला के विषय 'स्लिप होने से बेहतर है नींद ले लेना'– के दोनों पहलुओं को समझाया। उन्होंने कहा कि किसी भी कार्य को करने से पहले ही डरकर पीछे हट जाने से बेहतर है कि ठोकर खाकर भी आगे बढ़ा जाए।
उन्होंने सभी को दायित्व-बोध की भावना को समझने तथा अपने दायित्वों का सजगता एवं समर्पण के साथ निर्वहन करने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम के अंत में ज्ञानशाला प्रशिक्षिका अनीता चोपड़ा द्वारा शिशु संस्कार बोध भाग 1 से 5 पूर्ण करने वाली सभी प्रशिक्षिकाओं का सम्मान किया गया।
ज्ञानशाला परिवार की ओर से साध्वी उदितयशा जी ठाणा-4 के प्रति अनंत कृतज्ञता। आपके अमूल्य मार्गदर्शन एवं आशीर्वाद का लाभ सम्पूर्ण ज्ञानशाला परिवार को सदैव मिलता रहे, ऐसी मंगलकामना।