नशामुक्ति : स्वस्थ और संस्कारित जीवन का आधार

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गुवाहाटी।

नशामुक्ति : स्वस्थ और संस्कारित जीवन का आधार

नशा मनुष्य के जीवन को भीतर से खोखला करने वाली एक ऐसी बुराई है, जो धीरे-धीरे व्यक्ति की शारीरिक शक्ति, मानसिक शांति, पारिवारिक सुख और सामाजिक प्रतिष्ठा को नष्ट कर देती है। नशे की शुरुआत प्रायः शौक या मित्रों के आग्रह से होती है, लेकिन आगे चलकर वही आदत व्यक्ति की स्वतंत्रता छीन लेती है। नशामुक्ति दिवस हमें यह संकल्प लेने की प्रेरणा देता है कि हम स्वयं नशे से दूर रहें और दूसरों को भी नशामुक्त जीवन के लिए प्रेरित करें। नशा केवल व्यक्ति को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि उसका दुष्प्रभाव पूरे परिवार पर पड़ता है।
नशे के कारण परिवार में तनाव, आर्थिक कठिनाइयाँ और आपसी विश्वास की कमी उत्पन्न हो सकती है। विशेष रूप से युवा पीढ़ी को नशे से बचाना आज की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। युवाओं की ऊर्जा राष्ट्र की शक्ति है। यदि यही ऊर्जा नशे में नष्ट होने के बजाय शिक्षा, संस्कार, सेवा, साधना और रचनात्मक कार्यों में लगे, तो समाज और राष्ट्र दोनों का भविष्य उज्ज्वल बन सकता है। अणुव्रत आंदोलन ने व्यक्ति के चरित्र निर्माण और संयमित जीवन को विशेष महत्त्व दिया है। नशामुक्ति केवल किसी एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि जीवनभर निभाया जाने वाला संकल्प है। व्यक्ति यदि अपने मन पर नियंत्रण रखना सीख जाए और बुरी आदतों के प्रति दृढ़ता से ‘नहीं’ कहना सीख ले, तो नशे की जकड़न से मुक्त होना संभव है। आत्मसंयम, विवेक और अच्छी संगति नशामुक्त जीवन की मजबूत आधारशिला हैं।