सादगी, संयम और अनुशासन के अभ्यास का अनूठा दिन

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चेन्नई ट्रिप्लीकेन।

सादगी, संयम और अनुशासन के अभ्यास का अनूठा दिन

तेरापंथ भवन में डॉ मुनि पुलकित कुमार जी ठाणा-2, नचिकेता मुनि आदित्य कुमार जी ठाणा के मंगल सानिध्य में तेरापंथ किशोर मंडल द्वारा day like a monk एक दिन साधुपन जैसा अनुभूति शिविर का आयोजन तेरापंथ युवक परिषद के तत्वावधान में किया गया। दिन भर चले शिविर में उपस्थित बच्चों ने उत्साह पूर्वक संयम जीवन का आनंद एवं अनुभव प्राप्त किया। प्रवचनसत्र में डॉ मुनिश्री ने कहा मुनि जीवन का आनंद अपरिमित होता है क्योंकि इससे आत्मसंयम की प्रेरणा जगाती हैं। जैन धर्म में त्याग को विशेष महत्व दिया जाता है, जीवन में सहजता और सरलता का विकास ही साधुपन कहलाता है। मुनिश्री ने आगे कहा आज के मोबाइल युग में बच्चे संस्कार और सादगी की तरफ ऐसे शिविरों के माध्यम से ही आकर्षित होते हैं। आज का शिविर संयम के भावों का विकास करने में अवश्य सहायक होगा। मुनिवर ने उपसंपदा संकल्प स्वीकार करवाकर दीक्षा विधि संपन्न की। हरीश भंडारी ने योग प्राणायाम तथा मानकचंद रांका ने कायोत्सर्ग कक्षा ली। शिविर का विशेष आकर्षण यह था कि शिविरार्थियों ने जैन मुनि की तरह वेशभूषा पहनी थी तथा पात्र में गोचरी करते हुए भोजन ग्रहण किया तो दिन भर ओघा- रजोहरण एवं मुंहपट्टी के साथ संयम पूर्वक चलने बोलने व खाने-पीने का अभ्यास किया। मुनिश्री ने संयम जीवन की कहानी स्वयं की जुबानी के अंतर्गत मुनि जीवन का महत्व समझाते हुए स्वयं के संयम जीवन की कहानी सुनाई। नचिकेता मुनि आदित्य कुमार जी ठाणा ने मनुष्य जीवन का क्या लक्ष्य व उद्देश्यों पर विवेचन किया। अर्हत वंदना के पश्चात साधुपन जैसे अनुभव कर रहे मयंक मर्लेचा, ऋत्विक चोरडिया, आरुष चोपड़ा, कुशल जैन व अमृत डागा ने अनुभव सुनाए। इस अवसर पर महासभा के आंचलिक प्रभारी विमल चिपड, जैन विश्व भारती के मंत्री ललित दूगड़, कोषाध्यक्ष गौतम समदड़िया तेयुप अध्यक्ष कोमल डागा, मंत्री श्रीकांत चौरडिया ने शुभकामनाएं प्रकट की।