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विशुद्ध ज्ञान और सद्गुणों से ही महान बनता है जीवन
परम पूज्य आचार्यश्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि डॉ. मदनकुमार जी ठाणा के मंगल सानिध्य में अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह बड़े उत्साह पूर्वक मनाया गया। केंद्रीय संस्था अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी के तत्वावधान में अणुव्रत समिति ग्रेटर सूरत द्वारा तेरापंथ भवन, रेलवे स्टेशन, स्कूल, कॉलेज आदि विविध स्थानों पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। आज 'जीवन विज्ञान दिवस' के अवसर पर उपस्थित जनमेदिनी को संबोधित करते हुए मुनिश्री ने कहा कि हर व्यक्ति विकास चाहता है, जिसके लिए श्रद्धा और अनुशासन अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में ज्ञान का बहुत बड़ा मूल्य है; जब विशुद्ध ज्ञान का द्वार खुलता है, तो जीवन आनंद से परिपूर्ण हो जाता है।
मुनिश्री ने आगे कहा संत-साधु आध्यात्मिक चिकित्सक होते हैं, जो शरीर की नहीं बल्कि आत्मा की चिकित्सा करते हैं। अणुव्रत, प्रेक्षाध्यान और जीवन विज्ञान इस आत्म-चिकित्सा के प्रमुख उपक्रम हैं। वह चारित्रिक विकास एवं सुखमय जीवन जीने की श्रेष्ठ कला है। आचार्यश्री तुलसी ने विश्व को अणुव्रत का दर्शन दिया। अहिंसा, सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह चरित्र के मुख्य आधार हैं। धन बढ़ जाने से कोई महान नहीं होता, चरित्र का विकास होने से आदमी महान होता है। इसी प्रकार धन की कमी से कोई दरिद्र नहीं होता वास्तविक दरिद्र वह है जिसके जीवन में चारित्रिक सद्गुण नहीं हैं। जीवन को प्रायोगिक बनाने के लिए उन्होंने चार सूत्रों को अपनाने की प्रेरणा दी।