संस्थाएं
विघ्न निवारण और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार
ओडिशा के इतिहास में प्रथम बार एवं मुनिश्री मोहजीत कुमारजी के सान्निध्य में 6वीं बार विघ्नहर ह्रीं कार अनुष्ठान का आयोजन श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, कटक के तत्वावधान में शहीद भवन के प्रांगण में हुआ। इस अनुष्ठान में 108 जोडों सह सैंकड़ो अनुष्ठानकर्ताओं ने आचार्य सिद्धसेन द्वारा रचित कल्याण मन्दिर स्तोत्र का मुनि जयेश कुमार के भावपूर्ण संगान के साथ उच्चारण एवं श्रवण किया। इस अवसर पर अनुष्ठान स्वर प्रस्तोता मुनि जयेश कुमारजी ने कल्याण मंदिर स्तोत्र की रचना से जुड़ी विशिष्ट चमत्कारी घटना का उल्लेख करते हुए कहा प्रभु पार्श्वनाथ का माहात्म्य और प्रभाव तीर्थंकर परंपरा में अपना अलग विशिष्ट स्थान रखता है।उनपर रचित अनेक स्तोत्र भक्तों की आस्था के अनन्य केंद्र है। इन्हीं स्तोत्रों की कड़ी में एक महत्वपूर्ण नाम है कल्याण मंदिर स्तोत्र। इस स्तोत्र के रचयिता आचार्य सिद्धसेन एक क्रांतिकारी पुरुष थे। वे कहते थे मेरा जन्म सिर्फ अतीत के गीत गाने नही हुआ है।अगर मैं कुछ नया नही कर सकूं तो मेरा जीवन व्यर्थ है। ऐसी सोच वाले रखने व्यक्ति द्वारा महान भक्ति काव्य की रचना कुछ विचित्र लग सकती है। पर सिद्धसेन भक्ति विरोधी नही थे। उन्हें वह स्तुति पसंद थी जो अपने आराध्य के गुणों को आत्मसात करने का भाव जागृत करें ना कि जो सिर्फ अपनी स्वार्थ सिद्धि का प्रयत्न हो।
यह अनुष्ठान भी सभी के लिए विघ्न निवारक ,सिद्धि दायक होने के साथ ही प्रभु पार्श्वनाथ के गुणों को अपनाने की प्रेरणा प्रदान करने वाला बने यह काम्य है। उपस्थित सभी अनुष्ठान कर्ताओं ने मुनि जयेश कुमारजी द्वारा प्रस्तुत कल्याण मंदिर स्तोत्र के संगान की प्रशंसा करते हुए कहा कि मुनिश्री के स्वरों के वाइब्रेशन ने उन्हें अंतर तक प्रकम्पित कर दिया। विघ्नहर ह्रीं कार अनुष्ठान का शुभारम्भ नमस्कार महामंत्र के साथ हुआ। मुनि भव्य कुमारजी ने पार्श्व स्तुति में प्रभु पार्श्व देव चरणों में गीत का संगान कर अनुष्ठान के क्रम को आगे बढाया। सभाध्यक्ष मुकेश सेठिया ने स्वागत स्वर प्रस्तुत किया। ॐ श्री पार्श्वनाथाय के सह मंत्रोच्चार से वातावरण में अपूर्वता प्रदान की गई। अनुष्ठान के दौरान ह्रीं का पिरामिड प्रत्येक सदस्य के सिर पर शक्ति का केन्द्रीकरण कर रहा था।ह्रीं आकृति में रोशनी का नवीनीकरण स्पॉट रोशनी के माध्यम से किया गया। ह्रीं कार अनुष्ठान में 108 जोड़ों की सहभागिता उनकी साधना के उत्साह को मुखर कर रही थी। कटक, ओडिशा के इतिहास में ऐसा उपक्रम सम्पूर्ण नवीनता एवं आध्यात्मिकता लिए हुए प्रथम बार हुआ। कार्यक्रम संयोजक विकास नौलखा ने भावाभिव्यक्ति दी। सभा मंत्री रंजीत दुग्गड ने आभार प्रकट किया।