त्रिदिवसीय प्रेक्षाध्यान शिविर का समापन

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बालोतरा।

त्रिदिवसीय प्रेक्षाध्यान शिविर का समापन

बालोतरा। तेरापंथ सभा के तत्वावधान में प्रोफेसर डॉ साध्वी मंगलप्रज्ञाजी के सान्निध्य एवं निर्देशन में, बालोतरा, तेरापंथ भवन में त्रिदिवसीय प्रेक्षाध्यान शिविर आयोजित हुआ। आज उसका समापन समारोह के अवसर पर साध्वी मंगल प्रज्ञा ने कहा- प्रेक्षाध्यान दृष्टि परिवर्तन की प्रक्रिया है। आचार्य तुलसी के सुचिन्तन एवं प्रेक्षा प्रणेता आचार्यश्री महाप्रज्ञ के प्रायोगिक साधना से युग को प्रेक्षाध्यान पद्ध‌ति प्राप्त हुई। आज तनाव और विषम परिस्थिति‌यों से ग्रसित मानवजाति के लिए प्रेक्षाध्यान साधना पद्धति-कारगर उपाय है। शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक अनेक समस्याओं का समाधान प्राप्त किया जा सकता है।
आज आपाधापी जिन्दगी से उबरने के लिए व्यक्ति बाहर की यात्रा करता है, पर वह शान्ति नहीं मिलती जो भीतर की यात्रा से प्राप्त होती है। ध्यान साधना मार्ग भीतर प्रवेश और खुद की पहचान का मार्ग है। जब खुद को पहचान ने की गहरी तड़फ होती है, व्यक्ति लक्ष्य प्राप्त कर लेता है। दृढ़ संकल्प, आस्था, और पुरुषार्थ के द्वारा ही मंजिल मिलती है। साध्वी प्रो. मंगल प्रज्ञाजी ने कहा देश विदेशों में प्रेक्षाध्यान के शिविरों से-लाखों लोग लाभान्वित हो रहे हैं। प्रेक्षाध्यान के प्रयोगों द्वारा जीवन शैली-में बदलाव संभव है। बालोतरा में त्रिदिवसीय शिविर का सफल आयोजन हुआ। मुंबई से समागत उपासक प्रेक्षाध्यान प्रशिक्षक शांतिलाल कोठारी एवं मीना साबद्रा, साध्वी सुदर्शनप्रभाजी, डा.साध्वी राजुलप्रभाजी, डा.साध्वी चैतन्यप्रभाजी, डा.साध्वी शौर्यप्र‌भाजी ने - आसन, प्राणायाम, कायोत्सर्ग, ध्यान, अनुप्रेक्षा, मंत्रप्रेक्षा आदि प्रयोग करवाए एवं सैद्धान्तिक, प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षक शांतिलाल एवं शिविरार्थी सदस्यों ने प्रेक्षा संगान की प्रस्तुति दी। तेरापंथ सभा के मंत्री मोहनलाल बाफना सहमंत्री राजेश बाफना एवं सभा team ने जागरुकता से दायित्व का निर्वहण-किया। तेरापंथ सभा के मंत्री मोहन लाल बाफना ने मंच संचालन किया।