तपस्या से आत्म-शुद्धि और कर्म निर्जरा

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तपस्या से आत्म-शुद्धि और कर्म निर्जरा

मुनि प्रशांत कुमारजी और मुनि कुमुद कुमारजी के सानिध्य में विवेक पटावरी के मासमखुण तप अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया। मुनि प्रशांत कुमार ने कहा कि तपस्या महान कार्य है। भगवान महावीर स्वामी ने इसे मोक्ष का मार्ग बताया है। ज्ञान, दर्शन, चरित्र और तप के विकास से मुक्ति का रास्ता प्रशस्त होता है। तपस्या का लक्ष्य आत्मशुद्धि होना चाहिए। भक्ति, श्रद्धा और समर्पण के भाव से किया गया तप कर्मों की निर्जरा में सहायक होता है। वहीं, अभिमान और भौतिक कामनाओं के साथ तप करने से कर्मबंधन होता है। मुनि कुमुद कुमारजी ने कहा कि तप धार्मिक जीवन की पहचान है। आसक्ति, नकारात्मक भावों और कषायों का त्याग करना भी कठिन तप है। आत्मबल और गुरु की प्रेरणा से विवेक पटावरी ने यह तप पूरा किया है। महिला मंडल के मंगलाचरण से कार्यक्रम शुरू हुआ। सभा और विभिन्न संगठनों ने प्रशस्ति पत्र व साहित्य देकर तपस्वी का अभिनंदन किया। कार्यक्रम का संचालन मुनि कुमुद कुमार ने किया।