31 दिवसीय मासखमण तप का भव्य अभिनंदन

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केसिंगा।

31 दिवसीय मासखमण तप का भव्य अभिनंदन

स्थानीय तेरापंथ भवन में युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी के सुशिष्य मुनि हिमांशु कुमारजी एवं मुनि हेमंत कुमारजी का चातुर्मास गतिमान है। चातुर्मास के पावन अवसर पर श्रावक-श्राविकाओं द्वारा विभिन्न प्रकार की तपस्या एवं साधना की जा रही है। इसी तप आराधना की श्रृंखला में संजय जैन, सुपुत्र महेंद्र जैन एवं उर्मिला देवी जैन ने 31 दिवसीय उपवास की दीर्घ तपस्या, जिसे मासखमण तप कहा जाता है, पूर्ण कर आध्यात्मिक साधना के क्षेत्र में प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन मुनि हेमंत कुमारजी ने किया। समारोह में तपस्वी संजय जैन के परिवारजनों ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए उनकी तपस्या की हृदय से अनुमोदना की। उनके पिताजी, माताजी, पुत्री एवं भाई ने अपने विचार साझा करते हुए तपस्या के प्रति गौरव एवं प्रसन्नता व्यक्त की तथा संजय जैन के आध्यात्मिक पुरुषार्थ की सराहना की।
इस अवसर पर समाज की ओर से भी तपस्वी के प्रति अनुमोदना व्यक्त की गई। स्थानीय तेरापंथ सभा के अध्यक्ष रामकुमार जैन, उड़ीसा प्रांतीय जैन श्वेतांबर सभा के अध्यक्ष लक्ष्मी नारायण जैन, स्थानीय तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष अभिषेक जैन, तेरापंथ महिला मंडल की मंत्री नीलम जैन तथा TPF ईस्ट जोन के प्रेसिडेंट कमल कुमार जैन ने अपनी भावनाएं व्यक्त की। मुनि हिमांशु कुमारजीने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में तपस्या के महत्व को समझाते हुए कहा कि तप केवल शरीर को कष्ट देने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम और आंतरिक जागरण की साधना है। तप के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर की शक्तियों को जागृत करता है और आत्मिक उन्नति की दिशा में आगे बढ़ता है। उन्होंने तपस्वी संजय जैन के 31 दिवसीय मासखमण तप की अनुमोदना करते हुए उनके आध्यात्मिक जीवन की मंगलकामना की।