ध्यान साधना से आत्मसाक्षात्कार की ओर बढ़ते कदम

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चिक्कमगलूर।

ध्यान साधना से आत्मसाक्षात्कार की ओर बढ़ते कदम

साध्वी पुण्ययशा जी ठाणा-4 के सान्निध्य में प्रेक्षा फाउंडेशन के निर्देशानुसार तेरापंथ सभा द्वारा प्रेक्षा वाहिनी गांधीनगर बेंगलुरु के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय प्रेक्षाध्यान कार्यशाला का प्रेरणादायी एवं ज्ञानवर्धक आयोजन किया गया। कार्यशाला में मंडल की बहनों एवं भाइयों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम का शुभारंभ 'आत्मसाक्षात्कार प्रेक्षाध्यान के द्वारा' की सुमधुर संगीतिका के माध्यम से हुआ, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक एवं सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया। कार्यशाला में वरिष्ठ प्रेक्षा प्रशिक्षक डालमचंद सेठिया एवं इंटरनेशनल प्रेक्षा ट्रेनर रेणु कोठारी ने अपने प्रभावशाली एवं प्रेरणादायी मार्गदर्शन से सभी को प्रेक्षाध्यान के विभिन्न आयामों से परिचित कराया।
साथ ही प्रेक्षा प्रशिक्षक धनराज डूंगरवाला एवं विमल कटारिया का भी कार्यशाला में महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ। इंटरनेशनल प्रेक्षा ट्रेनर रेणु कोठारी ने अत्यंत सरल, स्पष्ट एवं प्रभावशाली शैली में प्रेक्षाध्यान के विभिन्न आयामों को विस्तारपूर्वक समझाया। उन्होंने सर्वप्रथम प्रेक्षाध्यान क्या है, इसका उद्देश्य क्या है तथा हमारे जीवन में इसका क्या महत्व है, इस विषय पर प्रकाश डाला। इसके पश्चात प्रेक्षाध्यान की कार्यपद्धति एवं उसके व्यावहारिक उपयोग को समझाते हुए विभिन्न ध्यान-पद्धतियों का प्रयोगात्मक अभ्यास करवाया। उन्होंने श्वास-प्रेक्षा, कॉन्शियस माइंड, सबकॉन्शियस माइंड आदि विषयों को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाया। वरिष्ठ प्रेक्षा प्रशिक्षक डालमचंद सेठिया ने प्रेक्षाध्यान के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि 'ढाई मिनट का प्रेक्षाध्यान बेला की तपस्या के बराबर है।' उनका यह कथन सभी के लिए अत्यंत प्रेरणादायी रहा। उन्होंने ध्यान को केवल कार्यशाला तक सीमित न रखते हुए इसे अपने दैनिक जीवन में उतारने की प्रेरणा दी।
साध्वी पुण्ययशा जी ने भी ध्यान एवं प्रेक्षाध्यान के महत्व पर अपना मंगल मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने ध्यान को आत्मनिरीक्षण, मानसिक संतुलन एवं आत्म-विकास का प्रभावी माध्यम बताते हुए इसे नियमित रूप से जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी। सम्पूर्ण कार्यशाला ज्ञान, अनुभव एवं आत्मचिंतन का सुंदर संगम रही। प्रत्येक प्रतिभागी को ध्यान की विभिन्न विधियों को समझने के साथ-साथ उनका प्रत्यक्ष अनुभव करने का अवसर मिला। कार्यशाला ने यह संदेश दिया कि प्रेक्षाध्यान केवल एक अभ्यास नहीं, बल्कि स्वयं से जुड़ने, अपने भीतर झांकने एवं सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ने की प्रभावी प्रक्रिया है। कार्यक्रम के अंत में सुरेंद्र गोखरू ने आभार व्यक्त करते हुए साध्वी जी के
प्रति कृतज्ञता प्रकट की तथा सभी प्रशिक्षकों, सहभागियों एवं सहयोगियों का धन्यवाद किया।