प्रभु पार्श्वनाथ जन्म कल्याणक दिवस के आयोजन

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प्रभु पार्श्वनाथ जन्म कल्याणक दिवस के आयोजन

माथाभांगा
मुनि प्रशांत कुमार जी, मुनि कुमुद कुमार जी के सान्निध्य में भगवान पार्श्वनाथ का जन्म कल्याणक मनाया गया। मुनि प्रशांत कुमार जी ने कहा कि भगवान पार्श्वनाथ का नाम विश्वविख्यात है। प्रभु का दूसरा नाम पुरुषादानीय बहुप्रचलित है, क्योंकि उनका व्यक्तित्व उस समय में भी बहुत लोकप्रिय था। हमें निष्काम भाव से तीर्थंकरों की भक्ति करनी चाहिए। बिना किसी फल की इच्छा से भगवान का स्मरण करने से निर्जरा होने के साथ पुण्य की भी सहज प्राप्ति हो जाती है। कल्याण मंदिर, उवसग्गहर स्तोत्र में उनकी स्तुति है, जिसे श्रद्धालु श्रावक समाज श्रद्धा से स्मरण करते हैं। धरणेंद्र व पद्मावती दोनों ही देवपुरुष का प्रभु पार्श्वनाथ के प्रति भक्तिभाव अनुकरणीय, वंदनीय है। उपकारी का उपकार कैसे चुकाया जाता है, उसका उदाहरण है धरणेंद्र पद्मावती। मुनि कुमुद कुमार जी ने कहा कि तीर्थंकर का च्यवन से लेकर मोक्ष तक का सफर पूरे विश्व के लिए कल्याणकारी होता है। नरक के जीवों को च्यवन, जन्म, दीक्षा, केवलज्ञान एवं मोक्ष प्राप्ति के समय क्षणिक सुख, शांति का अनुभव होता है, इसलिए इन्हें कल्याणक कहा जाता है। राजकुमार पार्श्वनाथ का नाग-नागिन को अंतिम समय में नवकार महामंत्र सुनाने का यह प्रसंग नवकार महामंत्र की महत्ता को बताता है। पूर्ण श्रद्धा आस्था के साथ जप का प्रयोग करने से यथोचित फल अवश्य मिलता है। महासभा प्रभारी राजकुमार बोथरा, माथाभांग सभा अध्यक्ष बाबूलाल भादाणी ने विचार व्यक्त किए। पार्श्वनाथ भगवान की स्तुति एवं जप का सामूहिक संगान किया गया।